Thursday, August 4, 2011

बुद्धी -विकास

बुद्धीमत्ता विकास का सही पता क्रोध के नियंत्रण से होता है।
 एक मनुष्य कितना बडा हो सकता है,उसका कितना अस्तित्त्व है,शायद यह दुनिया जितनी बडी है,उतना बडा एक मनुष्य है। हर मनुष्य अपनी सोच,अपनी भावना,अपनी दृष्टी,अपना मत,अपनी बुद्धी से दुनिया देखता है। इसमें दुसरों की सोच,दुसरों की भावना,दुसरे की दृष्टी,दुसरे का मत,दुसरे की बुदधी सम्म्लीत नही होती। इसलिए दुनिया वह अपनी नजरोंसे देखता है। शायद इसलिए मै कहता हु" एक मनुष्य दुनिया इतना बडा होता है"। इसलिए मनुष्य को समझना आसान नही होता है,बिना मनुष्य को समझे जीना आसान नही होता है। 

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